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तुमसे अच्छी थी वो कोठे वाली लड़की

तुमसे अच्छी तो वो कोठे वाली लड़की थी
जो कम से कम मेरा हाल तो पूछा करती थी ,
पैसों के लिए नहीं
शायद मेरे जज़्बात समझा करती थी |

मेरे आसुंवो के गिरने से पहले
उनमें तुम्हारा नाम बार-बार ढूंढ़ा करती थी ,
शायद तकलीफ़ होती थी उसे मुझे उस हालत में देख
तभी तो मेरे फ़िर आने का
वो बड़ी बेसब्री से इंतज़ार किया करती थी |
मेरे सीने पर रख सर अपना
अंदर की गूंजती आवाज़ों को घंटों सुना करती थी ,
शायद हो जाती थी उसकी भी आंखें नम
तभी तो वो अंदर का प्यार
अपने दिल से बार-बार छूना चाहती थी |
कभी मुस्कुराती तो कभी अपनी नज़रें झुकाती
शायद इसी को ही वो अपना प्यार कहती थी ,
पढ़ लेता था मैं उसकी छोटी से छोटी बातों को
शायद इसी लिए तो वो मुझे अपना राजकुमार कहती थी
अपने हाथों से मुझे सुला कर
अपनी मनपसंद लोरी सुना कर ,
यार वो मुझसे एक बात कहती थी
" कि अगर आ गए होते तुम सबसे पहले
जब मेरी सौतेली मां
नए लोगों से मिलवाने के पहले
मेरे कपड़ों से ज्यादा मेरे जिस्म को बार-बार धोती थी |
शायद रह गया था उन यादों का गहरा निशान
उसके जिस्म पर ,
तभी तो वो अपना दिल
मेरे सिवा किसी और को ना देती थी |
शायद रहती थी मुर्दा मेरी ही तरह
पर यार , मेरे आ जाने से
ज़िंदा तो वो भी हो जाती थी |
कभी-कभी वक़्त कुछ यूं गुजरता
कि हमारी बातें भी ना हो पाती थी ,
अपनी दुनियां में खोई
दर्द से अपना गहरा रिश्ता तो वो भी ना तोड़ पाती थी |
शायद उसकी भी सांसे उतनी ही धीमी हो जाती थी
जितनी ये ज़िन्दगी मुझे तड़पाती थी |
मुझसे दूर रह कर भी
अपना एक सवाल एक ख्याल की तरह चुपके से ,
मेरे दिल के अंदर छोड़ जाती थी
" कि क्या ज़िन्दगी उसे उतना ही तड़पाती थी
जितना वो चाहती थी ?
या फिर उसकी किस्मत उससे वो सब छिन लेती थी
जो हर बार ये चाहती थी |
शायद इन दोनों का जवाब एक ही था
" वो कुछ और नहीं
मेरे अंदर उसके लिए छुपाएं प्यार को
एक राज की तरह
बार-बार ढूंढ़ना चाहती थी |
या फ़िर शायद - वो मुझे !
सिर्फ़ मुझे पाना चाहती थी |
#तुमसे_अच्छी_तो_वो_लड़की वो!
✍️Sahni Baleshwar
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